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ए- मेरी मोहब्बत

 मेरी हर सांस अमानत है तेरी यादों की,  ए- मेरी मोहब्बत  तू ही बता, अब टूट कर इससे ज्यादा तुझे चाहूं तो कैसे?

शायद में...

शायद में नींद में हुँ इसलिए बार-बार लड़खड़ा रही हूँ,  शायद इस बार सोदा मेने अपना किया था इसलिए बार-बार हार रही हूँ।

Khash ke...

Khash ke wo yetne pas hote maire, k mujhe ye "khash" na kehna padta!

एक ऐसा..

एक ऐसा इंसान चाहिए जो हंसते हुए चेहरे को देखकर कहे "इतना उदास क्यों है? कितने गम छुपाए बैठे हो?"

जाओ...

जाओ! हमने अब वह रास्ता भी छोड़ दिया, जिस रास्ते की मंजिल तुम पर खत्म होती थी!

तुम शिकायत...

तुम शिकायत करो तो अच्छा लगता है, मगर तुम्हारी खामोशी से डर लगता है।