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क्या बताऊं....

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क्या बताऊं दर्द कितना है!  आंखों में समंदर है फिर भी मुस्कुरा रहा हूं।

सुना था....

सुना था नाज़ यह राहात-ए-शहर है! हमें तो नज़्र-ए-आतिश मालूम होता है। Meaning- राहात-ए-शहर - city of joy नज़्र-ए-आतिश - to set (something on fire), आग के कारण नष्ट या बरबाद

बदले नहीं हे...

बदले नहीं हे संभल गए हैं....

वह भूल...

वह भूल जाता है कभी-कभी कि मैं भी एक इंसान हूं...

मेरी आखरी मोहब्बत....

मेरी आखरी मोहब्बत....  तू ऐसा, मेरे ख्वाबों जैसा, तू वैसा, मेरे सोच जैसा।  तू ऐसा, मेरे किताबें जैसा, तू वैसा, मेरे कहानी के किरदार जैसा।

थोड़ी देर से ही सही...

थोड़ी देर से ही सही मगर दिल टूटा तो समझ आया इस दुनिया मे मेरे अल्लाह के अलावा कोई किसी का नहीं।

पूरा दिन...

पूरा दिन बहुत मसरूफ रहता है अपनी जिंदगी में, लेकिन अपनी तन्हाई के कुछ पलों मै मुझे याद तो करता होगा। वह मुझ जैसी मोहब्बत ना सही नाज़ थोड़ी तो मोहब्बत करता होगा।

मैं तुम्हारा नहीं हूं...

मैं तुम्हारा नहीं हूं, ना तुम्हारा कभी हो सकता हूं, लेकिन मैं वादा करता हूं तुम्हें मुझसे भी बेहतर कोई मिलेगा।

पूरा दिन...

पूरा दिन बहुत मसरूफ रहता है अपनी जिंदगी में, लेकिन अपनी तन्हाई के कुछ पलों मै मुझे याद तो करता होगा। वह मुझ जैसी मोहब्बत ना सही नाज़ थोड़ी तो मोहब्बत करता होगा।

तुमने मुस्कुरा...

तुमने मुस्कुरा कर जाते हुए कहां "तुम्हें भुला दूं", यह भी बताती जाती के भूलने की शुरुआत कहा से करना है।

मेरी मोहब्बत...

मेरी मोहब्बत कोई खुशबू नही जो वक्त गुजरने के साथ हवा में समा जाए...

तू सोच...

तू सोच मेरी ब-ज़बान-ए-हाल तुझे ना देखकर अगर ऐसी है, तो... तू सोच मेरी ज़बान-ए-हाल तुझे देखकर क्या होगी.......