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Showing posts from April, 2024

कैसे समझाऊं तुम्हे!

 कैसे समझाऊं तुम्हे! तुमसे मोहब्बत मेरे इख़्तियार मैं नहीं थी।

ए- मेरी मोहब्बत

 मेरी हर सांस अमानत है तेरी यादों की,  ए- मेरी मोहब्बत  तू ही बता, अब टूट कर इससे ज्यादा तुझे चाहूं तो कैसे?

शायद में...

शायद में नींद में हुँ इसलिए बार-बार लड़खड़ा रही हूँ,  शायद इस बार सोदा मेने अपना किया था इसलिए बार-बार हार रही हूँ।

Khash ke...

Khash ke wo yetne pas hote maire, k mujhe ye "khash" na kehna padta!

एक ऐसा..

एक ऐसा इंसान चाहिए जो हंसते हुए चेहरे को देखकर कहे "इतना उदास क्यों है? कितने गम छुपाए बैठे हो?"

जाओ...

जाओ! हमने अब वह रास्ता भी छोड़ दिया, जिस रास्ते की मंजिल तुम पर खत्म होती थी!

तुम शिकायत...

तुम शिकायत करो तो अच्छा लगता है, मगर तुम्हारी खामोशी से डर लगता है।

बहुत कम शब्दों में...

बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ लिखना है, जिंदगी बहुत छोटी है जब तक सांस चलेगी तब तक जीना है।

नाज़ कितनी आसानी से...

नाज़ कितनी आसानी से बोल देती हो ना वह, "मैं अब किसी ओर की हूं... किसी ओर की हूं....." जब मेरे साथ थी तब क्यों नहीं कहती थी वो,   "मैं सिर्फ तुम्हारी हूं... सिर्फ तुम्हारी हूं...."

तूने तो...

तूने तो कुछ सोचने का मौका तक नहीं दिया! कब तू दिल में आया, कब तू दिल से उतर गया।

किसी दिन वह..

किसी दिन वह इंसान तो रहेगा मगर उससे राब्ता करने का जरिया न मिलेगा....

किसी दिन वह..

किसी दिन वह इंसान तो रहेगा मगर उससे राब्ता करने का जरिया न मिलेगा....

मालूम तो था..

मालूम तो था तुझे की तू मेरी किस्मत नहीं, फिर क्यों टकराया तू मेरे दिल से....

यह कैसी मोहब्बत है...

यह कैसी मोहब्बत है नाज़ रोज जख्म दे कर कहती है "अपना ख्याल रखना।"

कहां से ढूंढ लाए....

कहां से ढूंढ लाए वह पल, जिस पल कह सके हम,  के उस पल हमने उनको याद ना किया।

लोग परखते है....

लोग परखते है मुझे मेरी बातों से, मेरी मुस्कुराहट से, मेरे लिबास से, मेरे गुस्से से, मेरे आंखों से,कोई मिला नही ऐसा जो समझे मुझे मेरी बातों में छुपे जज्बातों से, मेरी मुस्कुराहट में छुपे खामोशी से, मेरे लिबास में छुपे जख्मों से, मेरे गुस्से में छुपे प्यार से, मेरे आंखों में छुपे दर्द से....कोई मिल ही नहीं...

हमें..

हमें कोई लगावट दिखाता है तो हमें डर लगता है,क्योंकि हर बार लगावट हमें खा गया है।

उसका इतराना तो...

उसका इतराना तो बनता है नाज़! क्योंकि वह पसंद है उसकी जिसे हर कोई पसंद नहीं आता।

हर..

हर अफ़्साना कामिल हो यह जरूरी तो नहीं नाज़...

उसका इतराना तो...

उसका इतराना तो बनता है नाज़! क्योंकि वह पसंद है उसकी जिसे हर कोई पसंद नहीं आता।

तन्हाई से मोहब्बत हैं हमें....

तन्हाई से मोहब्बत हैं हमें, हमारा अकेले रहना बेहतर लगता है।

मैं तो बस खिलौना था....

मैं तो बस खिलौना था उसका दिल बहलाने को,  उसका दिल बहल गया तो उसने मुझे बक्से में बंद कर दूर फेंक दिया।

वह कहती ...

वह कहती है नाज़ में बदल रहा हूं, उसे नहीं दिखता मैं धीरे-धीरे खत्म हो रहा हूं।

मैं तो बस खिलौना था....

जिंदगी तमाशा नहीं जिसे देखने को हुजूम आए, कम लोग हो लेकिन पसंदीदा लोग हो,  जो हुजूम-ए-आम तक साथ चले।

जिंदगी तमाशा नहीं...

जिंदगी तमाशा नहीं जिसे देखने को हुजूम आए, कम लोग हो लेकिन पसंदीदा लोग हो,  जो हुजूम-ए-आम तक साथ चले।

शिकायत कभी ये नहीं थी.....

शिकायत कभी ये नहीं थी तुमसे, तुम एसे नहीं हो, वैसे नहीं हो, एसे क्यो नहीं हो, वैसे क्यो नहीं हो गम तो बस इस बात का है कि तुम जैसे थे, बस अब वैसे नहीं रहे।

क्या बताऊं....

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क्या बताऊं दर्द कितना है!  आंखों में समंदर है फिर भी मुस्कुरा रहा हूं।

कोई इंसान आपकी कदर के तो...

कोई इंसान आपकी कदर के तो उसे संभाल कर रखना,  क्योंकि जिस दिन वह इंसान चला जाएगा,  वह इंसान तो परेशान करने को नहीं रहेगा मगर उसकी यादें आपको हर रोज परेशान करेंगी,  जो ना आपको जीने देगी ना मरने देगी। कदर करो उसकी जो आपके के पास मौजूद है।

सुना था....

सुना था नाज़ यह राहात-ए-शहर है! हमें तो नज़्र-ए-आतिश मालूम होता है। Meaning- राहात-ए-शहर - city of joy नज़्र-ए-आतिश - to set (something on fire), आग के कारण नष्ट या बरबाद

बदले नहीं हे...

बदले नहीं हे संभल गए हैं....

वह भूल...

वह भूल जाता है कभी-कभी कि मैं भी एक इंसान हूं...

मेरी आखरी मोहब्बत....

मेरी आखरी मोहब्बत....  तू ऐसा, मेरे ख्वाबों जैसा, तू वैसा, मेरे सोच जैसा।  तू ऐसा, मेरे किताबें जैसा, तू वैसा, मेरे कहानी के किरदार जैसा।

थोड़ी देर से ही सही...

थोड़ी देर से ही सही मगर दिल टूटा तो समझ आया इस दुनिया मे मेरे अल्लाह के अलावा कोई किसी का नहीं।

पूरा दिन...

पूरा दिन बहुत मसरूफ रहता है अपनी जिंदगी में, लेकिन अपनी तन्हाई के कुछ पलों मै मुझे याद तो करता होगा। वह मुझ जैसी मोहब्बत ना सही नाज़ थोड़ी तो मोहब्बत करता होगा।

मैं तुम्हारा नहीं हूं...

मैं तुम्हारा नहीं हूं, ना तुम्हारा कभी हो सकता हूं, लेकिन मैं वादा करता हूं तुम्हें मुझसे भी बेहतर कोई मिलेगा।

पूरा दिन...

पूरा दिन बहुत मसरूफ रहता है अपनी जिंदगी में, लेकिन अपनी तन्हाई के कुछ पलों मै मुझे याद तो करता होगा। वह मुझ जैसी मोहब्बत ना सही नाज़ थोड़ी तो मोहब्बत करता होगा।

तुमने मुस्कुरा...

तुमने मुस्कुरा कर जाते हुए कहां "तुम्हें भुला दूं", यह भी बताती जाती के भूलने की शुरुआत कहा से करना है।

मेरी मोहब्बत...

मेरी मोहब्बत कोई खुशबू नही जो वक्त गुजरने के साथ हवा में समा जाए...

तू सोच...

तू सोच मेरी ब-ज़बान-ए-हाल तुझे ना देखकर अगर ऐसी है, तो... तू सोच मेरी ज़बान-ए-हाल तुझे देखकर क्या होगी.......

मैं...

मैं बेसब्र हूं तेरे इंतजार में, तू बेखबर है मेरे इंतजार से.....

हमेशा याद रहेगा....

हमेशा याद रहेगा यह दौर-ए-जहाँ हमको, क्या तरसाया है जहाँ ने उस शख़्स-ए-ग़ैर के लिए! Meaning- दौर-ए-जहाँ - Revolution of the world, दुनिया की परिक्रमा शख़्स-ए-ग़ैर - Unknown man, अज्ञात आदमी