लोग परखते है मुझे मेरी बातों से, मेरी मुस्कुराहट से, मेरे लिबास से, मेरे गुस्से से, मेरे आंखों से,कोई मिला नही ऐसा जो समझे मुझे मेरी बातों में छुपे जज्बातों से, मेरी मुस्कुराहट में छुपे खामोशी से, मेरे लिबास में छुपे जख्मों से, मेरे गुस्से में छुपे प्यार से, मेरे आंखों में छुपे दर्द से....कोई मिल ही नहीं...