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नाज़ कितनी आसानी से...

नाज़ कितनी आसानी से बोल देती हो ना वह, "मैं अब किसी ओर की हूं... किसी ओर की हूं....." जब मेरे साथ थी तब क्यों नहीं कहती थी वो,   "मैं सिर्फ तुम्हारी हूं... सिर्फ तुम्हारी हूं...."

तूने तो...

तूने तो कुछ सोचने का मौका तक नहीं दिया! कब तू दिल में आया, कब तू दिल से उतर गया।

मालूम तो था..

मालूम तो था तुझे की तू मेरी किस्मत नहीं, फिर क्यों टकराया तू मेरे दिल से....

यह कैसी मोहब्बत है...

यह कैसी मोहब्बत है नाज़ रोज जख्म दे कर कहती है "अपना ख्याल रखना।"

हर..

हर अफ़्साना कामिल हो यह जरूरी तो नहीं नाज़...

तन्हाई से मोहब्बत हैं हमें....

तन्हाई से मोहब्बत हैं हमें, हमारा अकेले रहना बेहतर लगता है।

मैं तो बस खिलौना था....

मैं तो बस खिलौना था उसका दिल बहलाने को,  उसका दिल बहल गया तो उसने मुझे बक्से में बंद कर दूर फेंक दिया।

वह कहती ...

वह कहती है नाज़ में बदल रहा हूं, उसे नहीं दिखता मैं धीरे-धीरे खत्म हो रहा हूं।

मैं तो बस खिलौना था....

जिंदगी तमाशा नहीं जिसे देखने को हुजूम आए, कम लोग हो लेकिन पसंदीदा लोग हो,  जो हुजूम-ए-आम तक साथ चले।