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बहुत कम शब्दों में...

बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ लिखना है, जिंदगी बहुत छोटी है जब तक सांस चलेगी तब तक जीना है।

नाज़ कितनी आसानी से...

नाज़ कितनी आसानी से बोल देती हो ना वह, "मैं अब किसी ओर की हूं... किसी ओर की हूं....." जब मेरे साथ थी तब क्यों नहीं कहती थी वो,   "मैं सिर्फ तुम्हारी हूं... सिर्फ तुम्हारी हूं...."

तूने तो...

तूने तो कुछ सोचने का मौका तक नहीं दिया! कब तू दिल में आया, कब तू दिल से उतर गया।

किसी दिन वह..

किसी दिन वह इंसान तो रहेगा मगर उससे राब्ता करने का जरिया न मिलेगा....

किसी दिन वह..

किसी दिन वह इंसान तो रहेगा मगर उससे राब्ता करने का जरिया न मिलेगा....

मालूम तो था..

मालूम तो था तुझे की तू मेरी किस्मत नहीं, फिर क्यों टकराया तू मेरे दिल से....

यह कैसी मोहब्बत है...

यह कैसी मोहब्बत है नाज़ रोज जख्म दे कर कहती है "अपना ख्याल रखना।"